वित्त मंत्रालय अधर में, जेटली डायलिसिस पर, वित्त सचिव अधिया भी लम्बी छुट्टी पर गए

मोदी कर्नाटक के चुनाव प्रचार में व्यस्त, सरकार बिना पायलट के विमान की तरह 

  • केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक महीने तक कार्यालय में भाग नहीं लिया है क्योंकि वह गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वित्त सचिव हस्मुख अधिया अपने गुरु स्वामी स्वामीदानंद सरस्वती के पास मैसूर में योग-ध्यान के लिए चले गए हैं। उन्होंने असामान्य रूप से 5 मई से 20 मई तक का अवकाश लिया है। उनकी अनुपस्थिति में व्यय सचिव एएन झा के कार्य संभालने की उम्मीद है।

वित्त मंत्रालय के शीर्ष दो की अनुपस्थिति अनुपस्थिति गंभीर सवाल उठाती है कि मोदी सरकार के जहाज और मौलिक शासन को कौन देख रहा है।

जबकि मोदी सुशासन पर जोर देते रहते हैं। वित्त मंत्रालय में इन दिनों कई तरह के झंझट हैं। जीएसटी का रोल आउट, पीएनबी में नीरव मोदी का घोटाला, आईसीआईसीआई बैंक की चंदा कोचर का वीडियोकॉन घोटाले में नाम आना आदि। बीते चार वर्षों में वित्त मंत्रालय ने निरीक्षक राज को फिर से ला दिया है। इस अवधि में निर्यात वृद्धि की दर शून्य है। नोटबंदी का आत्मघाती कदम उठाया गया है। ये सब मौजूदा सरकार के लिए अगले आम चुनाव में भारी दिक्कतें खड़ी कर सकते हैं।

हाल ही में अधिया ने खुलासा किया था कि उन्हें एक अज्ञान उपहारदाता की तरफ से सोने के बिस्कुट रिश्वत के तौर पर भेजे गए थे। उसे उन्होंने राजकोष में जमा करा दिया था। पर उन्होंने इसे लेकर कोई शिकायत पुलिस या सीबीआई से नहीं की, जबकि यह केन्द्र के एक वरिष्ठ अधिकारी को रिश्वत देने का प्रयास था।

जेटली जो मोदी के लिए अनिवार्य प्रतीत होते हैं, उनकी अनुपस्थिति वित्त मंत्रालय में एक बड़ा सुराख छोड़ देती है। गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी अधिया मोदी के असाधारण रूप से करीबी माने जाते हैं जिन्होंने लम्बे समय तक गुजरात में उनके साथ काम किया है। इस महत्वपूर्ण परिस्थिति में उनका लम्बी छुट्टी पर जाना भी बहुत असामान्य है। खासकर, ऐसी स्थिति में जब वित्त मंत्रालय के राज्य-मंत्री अपने कामकाज के बारे में काफी अनजान हों। जेटली ने शायद ही कोई जिम्मेदारी उन्हें अब तक सौंपी हो। एक राज्य मंत्री गोरखपुर के प्रताप शुक्ल की वित्त से सम्बन्धित कोई पृष्ठभूमि नहीं है। दूसरे राज्य मंत्री राधाकृष्णन के बारे में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है।

नार्थ ब्लॉक में वित्त सचिव अधिया की लम्बी छुट्टी पर जाने को लेकर कई तरह के किस्से चल रहे हैं। सरकार के लिए कई बार परेशानी खड़ी करने वाले भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने हाल ही में एक भयंकर हमला किया था। उन्होंने जेटली और अधिया दोनों को जीएसटीएन “घोटाले” के लिए जिम्मेदार बताया था। स्वामी ने अपने पसंदीदा हथियार ट्विटर का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि “ जीएसटी घोटाले में उनकी भूमिका को देखते हुए मैं मांग करता हूं कि वित्त सचिव अधिया का कपड़ा मंत्रालय जैसे किसी दूसरे मंत्रालय में तबादला कर देना चाहिए।”

अधिया केबिनेट सचिव की रेस में सबसे आगे थे, पर स्वामी के निरंतर सार्वजनिक हमलों और सोने के बिस्कुट वाले विवाद के चलते इसकी संभावना कम हो गई है।

आम तौर पर, महत्वपूर्ण मंत्रालयों में सचिव स्तर के अधिकारी लंबे समय तक अवकाश पर नहीं जाते हैं जब तक कि वे अस्वस्थ न हों या उनके परिवार में कोई दिक्कत न हो। अधिया की छुट्टी ने निश्चित रूप से प्रश्न उठाए हैं क्योंकि यह अपनी तरह का पहला मामला है।

यह बड़ा मुद्दा है कि क्यों एक कार्यशील वित्त मंत्रालय देश में नहीं है। जेटली का सुव्यवस्थित मीडिया नेटवर्क कई स्टोरी चला सकती हैं कि किस तरह वित्त मंत्रालय सामान्य तरीके से काम कर रहा है लेकिन हकीकत यह नहीं है।

जेटली सप्ताह में दो बार डायलिसिस ले रहे हैं और संक्रमण से उन्हें बचाकर रखा जा रहा है। वे कार्यालय की बैठकों में भाग नहीं ले रहे हैं। किडनी ट्रांस्प्लांट के बाद, जिसकी तारीख अभी अनिश्चित है उन्हें फिर से पूरी तरह स्वस्थ होने की जररूत पड़ेगी, जिसमें कई महीने लग सकते हैं। फिलहाल तो उनके घर के बाहर एक तख्ती लगी है, जिसमें लिखा है- ‘आगंतुकों को अनुमति नहीं।’

सूत्र कहते हैं कि वित्त मंत्रालय के कई जटिल कार्यों के निपटारे में दिक्कतें आ रही है। वित्त मंत्रालय का कामकाज ठहरा हुआ सा है। मोदी, अधिया के जरिये वित्त मंत्रालय पर नियंत्रण करने की बजाय किसी अन्य मंत्री को अस्थायी रूप से इसका प्रभार दे सकते थे।

जैसा कि हम देख रहे हैं मोदी कर्नाटक में प्रचार में व्यस्त हैं। जहां वह 17 रैलियों को सम्बोधित कर रहे हैंe। इस बीच उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक आपदा में 70 लोगों की मौत के बाद भी राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर्नाटक में “जिहादियों” पर हमला किया।  एक और तूफान का पूर्वानुमान होने के बाद, वे आगरा के लिए रवाना हुए।

मोदी के युग में ज्यादातर चीजों की तरह, सुशासन केवल चुनाव नारा है। आने वाले दिनों में वित्त मंत्रालय एक नेतृत्व विहीन मिनिस्ट्री के रूप में जाना जाएगा।

(Source-newscentral24x7.com/Swati chaturvedi)

 

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